मशरूम की खेती स्वावलंबन एवं आत्मनिर्भरता का अवसर

मशरूम की खेती स्वावलंबन एवं आत्मनिर्भरता का अवसर
मंदसौर:- राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आइक्यूएसी द्वारा प्रायोजित स्वरोजगार के उद्देश्य हेतु एक दिवसीय कार्यशाला 'मशरूम की खेती ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार हेतु अवसर' का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ माननीय विधायक महोदय श्री यशपाल सिंह सिसोदिया द्वारा किया गया। माननीय विधायक महोदय ने विद्यार्थियों को स्वसहायता समूह की उपयोगिता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति मे निहित स्वरोजगार की संकल्पना के लिए मशरूम की खेती को उपयोगी बताया। इसके द्वारा आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है और हम एक भारत- श्रेष्ठ भारत को नवाचार के द्वारा पूरा कर सकते हैं। मंदसौर कृषि आधारित उत्पादों के लिए अत्यंत उपजाऊ भूमि एवं अनुकूल जलवायु वाला क्षेत्र है। मशरूम की वैज्ञानिक तरीके से खेती कर उसके उत्पाद को बढ़ाया जा सकता है। मशरूम की खेती आर्थिक स्वावलंबन को प्रेरित करती है जिसके द्वारा परिवार की अर्थव्यवस्था समृद्धि तो बढ़ेगी ही, साथ ही प्रदेश एवं देश को भी अग्रिम पंक्ति में बनाए रखने में मदद करेंगे। इस तरह की कार्यशालाओं के द्वारा विद्यार्थी पढ़ाई करते हुए ही रोजगार एवं अर्थ प्राप्ति भी कर सकते हैं। कार्यशाला की अध्यक्षता शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य महोदय डॉ. रविन्द्र कुमार सोहोनी द्वारा की गई। उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों द्वारा शिक्षा के नए आयाम प्राप्त करने होंगे। मशरुम की खेती सामान्यतः प्रचलन में नहीं है लेकिन यह अति उपयोगी है जिसे विद्यार्थी सीखें और इसका प्रयोग अपने क्षेत्र में करें। इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता और विषय विशेषज्ञ डॉक्टर राजेश प्रसाद पटेल, एसोसिएट प्रोफेसर एवम् वरिष्ठ वैज्ञानिक उद्यानिकी महाविद्यालय मंदसौर ने विद्यार्थियों को मशरूम व इसके उत्पादन की प्रक्रिया, अधिक उपजाऊ प्रजातियां और उनकी मार्केटिंग आदि के बारे में बताया। मोरचेला मशरूम ₹50000 प्रति किलो एवं कोर्डीसेप प्रजाति ₹100000 प्रति किलो तक मार्केट में बिकती है अतः इसी तरह की अन्य किस्में जैसे फ्लोरिडा मिल्की मशरूम, बटन मशरूम इत्यादि का उत्पादन कर सकते हैं। कुपोषण को समाप्त करने के लिए प्रोटीन तत्व में भरपूर मशरूम की खेती के द्वारा कुपोषण से मुक्ति के अलावा इसके अवशिष्ट को आर्गेनिक खाद में उपयोग किया जा सकता है। कार्यशाला की संयोजक डॉ. प्रेरणा मित्र ने बताया कि विद्यार्थियों ने मशरूम की खेती की कार्यशाला के लिए बढ़-चढ़कर के उत्साह पूर्वक अपना रजिस्ट्रेशन कराया है जिसमें मंदसौर महाविद्यालय के अतिरिक्त आसपास के एवं अशासकीय महाविद्यालय के प्रतिनिधियों के रूप में प्राध्यापकों एवं छात्र छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया है। कार्यक्रम संचालन महाविद्यालय के प्राणिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रो. संदीप सोनगरा ने किया एवम् विभागाध्यक्ष वनस्पति शास्त्र प्रो निंगवाल ने इसे विद्यार्थियों के लिए बहुउपयोगी बताया। आभार डॉ. प्रेरणा मित्रा, संयोजक कार्यशाला, वनस्पति शास्त्र द्वारा किया गया

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