प्लास्टिक का बेहतर विकल्प हो सकते जलीय पौधे (शैवाल)
सिंगल यूज प्लास्टिक जिसका इस्तेमाल कैरी बैग,पैकेजिंग और पानी की बोतल आदि सामग्री बनाने में किया जाता है l यह सफेद प्रदूषण हमारी प्रकृति के लिए अभिशाप बन चुके हैं l पिछले कुछ दशकों में प्लास्टिक का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ा है, या यूं कहें कि प्लास्टिक हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है l और प्लास्टिक के कचरे में सबसे ज्यादा योगदान प्लास्टिक की थैलियों का होता है l यह सफेद प्रदूषण पशुओं की मौत का एक सबसे बड़ा कारण है, प्लास्टिक हमारे जंगल, समुद्र, नदियों, के लिए खतरा बन चुका है कारण प्लास्टिक अपशिष्ट का अपघटन होने में 500 बर्ष का समय लेना है l यह पर्यावरण और मानव के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है क्योंकि हम सभी लोग इस समस्या से भलीभांति परिचित हैं l तो हम बात करेंगे विकल्प की आजकल कुछ बड़ी कंपनियों के द्वारा बायोप्लास्ट से कैरी बैग,पानी की बोतल आदि सामग्री बनाई जा रहे हैं l बायोप्लास्ट का मतलब ऐसा प्लास्टिक जो कि मक्का,साबूदाना, कसावा, गन्ना, चुकंदर, मशरूम आदि पौधों से प्राप्त सामग्री से बनाया जाता है l
यह एक विकल्प हो सकता है लेकिन पहला सभी बायोप्लास्ट बायोडिग्रेडेबल नहीं होते हैं l दूसरा बायोप्लास्ट बनाने वाले पौधों को उगाने के लिए ज्यादा जगह और ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है, और इनका फुटप्रिंट भी बड़ा हो सकता है l कृषि भूमि के लिए जंगलों को काटना पड़ेगा जो वातावरण के लिए अच्छा नहीं है l जलीय शैवालों के द्वारा प्लास्टिक का निर्माण एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है l
जलीय शैवालों में विशेष पॉलीमर पाए जाते हैं जो इसे प्लास्टिक की तरह लचीला बनाते हैं l यह एक बहुत अच्छा इको फ्रेंडली विकल्प है l दुनिया की लगभग 200 कंपनियां इस को परख रही हैं, और यह आसानी से अपघटित होने वाला प्लास्टिक है इंडोनेशिया में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक बनाने के लिए जलीय शैवाल की खेती की जाती है l प्लास्टिक बैग का एक और बेहतर विकल्प है जूट के रेशों से पर्यावरण के अनुकूल पॉलीबैग बनाना जो प्लास्टिक बैग की तरह दिखने वाले आसानी से अपघटित होते हैं l और इन्हें जलाने पर माइक्रोकेमिकल्स भी नहीं निकलते हैं अब बहुत जरूरी हो गया है कि हम प्लास्टिक से होने वाले खतरों के प्रति जागरूक हो और जागरूकता फैलाए, बाजार जाते समय हाथ में कपड़े की या कागज की थैली का होना हमारी परंपरा रही है हमें हमारी परंपरा पर गर्व होना चाहिए जिसमें कि प्लास्टिक का कहीं इस्तेमाल नहीं किया जाता था तो हम वापस अपनी संस्कृति और परंपरा को अपनाएं और पूरी तरीके से प्लास्टिक की थैली का उपयोग को बंद करें.
प्रो. प्रेरणा मित्रा
सहायक अध्यापक
वनस्पति विभाग शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मंदसौर
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