बेटी के साथ अन्याय में भी घटिया राजनीति संवेदनशील मसलो पर सस्ती लोकप्रियता का अवसर ढूंढना भी कुकृत्य

बेटी के साथ अन्याय में भी घटिया राजनीति  संवेदनशील मसलो पर सस्ती लोकप्रियता का अवसर ढूंढना भी कुकृत्य
बेटी के साथ अन्याय में भी घटिया राजनीति संवेदनशील मसलो पर सस्ती लोकप्रियता का अवसर ढूंढना भी कुकृत्य सारे आरोपी पकड़े गए । जुलूस भी निकाल दिया । तीन दिन से शामगढ़ गुस्से में है, बेटी का जीवन नर्क बनाने वाले राक्षस को सज़ा दिलवाने और ख़ौफ़ पैदा करने वाली कार्यवाही की मांग की जा रही है। ऐसे संवेदनशील मामलो में प्रशासन भी कार्यवाही में कोई कौर कसर नही छोड़ना चाहता है । लेकिन इन सबके बीच राजनीतिक नूराकुश्ती और सस्ती लोकप्रियता की चाह वाली घटिया मानसिकता को उजागर कर दिया है । एक बेटी के साथ एक शैतान ने रुपयों की चाह में ब्लैकमेल करते करते उसके जीवन के साथ खेल गया ।अब धीरे धीरे  यह लगने लगा है कि हिन्दू समाज की बेटियों के खिलाफ कोई योजना के अनुसार किया जाना वाला षडयंत्र है । इसमे यह सब ट्रेनिंग दी जाती है कि कैसे  बेटीयो की अस्मिता और भावनाओं से खेलना और उनका दुरुपयोग करना । हर कोई यही चाहता था कि कठोरतम कार्यवाही हो लेकिन कभी कभी अच्छी राजनीति करने वाले भी  इतना ओछी हरकते कर जाते है कि जो गंदगी का सबसे निम्नतम स्तर होता है । सुवासरा विधानसभा भी इसी घटिया राजनीति का हिस्सा बन गयी । जिसमे नेताओ के पिछलग्गू ओं ने जो कुछ किया  वह वाकई  बेहद घटिया और निम्नता के स्तर को छू गया । जब डेढ़ दिन से शामगढ़  बेटी के लिए लड़ रहा था । प्रशासन नगर पालिका सब अपना काम ईमानदारी से कर रहा था । विधानसभा सत्र का समापन होते ही विधायक के आने की जानकारी जानकारी मिलने लगी ।  कुछ  राजनीति के मानसिक रोगियों ने  नीचता दिखाई  आनन फानन में डेढ़ दिन से सो रहे । पूर्व विधायक ,एक इंदौरी सत्ता के लालची छुटभैये को चेलो ने बुलवाया । दोनो ने कार्यवाही पर उकसावे के भाषण पेल दिए । राजनीति चमकाने के लिए  प्रशासन को बेवजह कौसा गया । विधायकी के  सपने देखने वालों ने संवेदनशील घटना को राजनीतिक लाभ लेने के  लिए वर्तमान विधायक के विलेन बनाने  की व्यूह रचना तैयार की उकसावे के साथ में पिछलग्गुओं ने कोई चुडिया तो कोई नारेबाजी की योजना हुई ।   चल रही कार्यवाही का श्रेय लेने की कोशिशें होती ही है । लेकिन ऐसे समय मे विलेन बनाने की कोशिशें नेताओ की मानसिक घटिया पन की परतें खोलने वाली होती है कि आखिर सत्ता के लिए  चाल चरित्र चेहरे की बातें करने  वाले इस निम्नतम स्तर पर ? बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई को राजनीतिक हथियार बनाने का अवसर कितना उचित है ? बेटी को न्याय मिले यह हम सबकी नैतिक जवाबदेही है लड़ना भी चाहिए । प्रशासन में बैठे लोग भी इंसान ही होते है उनमे भी पिता पति भाई होता है वे भी कार्यवाही  ईमानदारी से ही करेंगे। समाज का गुस्सा जायज है । गुस्से का इजहार भी जरूरी है । लेकिन इसे अवसर को राजनीति क हथियार या सस्ती लोकप्रियता का हथकंडे के रूप में उपयोग करने वाले भी शायद उसी राक्षसी कृत्य की श्रेणी में लाता है । जिससे लिए संवेदनशील समाज निःस्वार्थ भाव से आक्रोशित और मैदान में है और न्याय के लक्ष्य की और है  । समाज का राजनीतिक लक्ष्य प्राप्ति के लिए उपयोग की वस्तु समझना जनमानस को ठेस पहुंचाने वाला हैं ।

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